मीरां बाई किसी भी हिन्दी प्रेमी के लिये अन्जाना नाम नहीं है। राजस्थान के मेड़ता की इन महान कवियत्री, संत, गायिका ने कृष्ण की भक्ति में डूब कर जो रचनायें हमें दी है, वह अनमोल है।
मीरां बाई की रचनायें शुद्ध सरल राजस्थानी, हिन्दी और गुजराती में है। सामान्य हिन्दी जानने वाला कोई भी इन रचनाओं को आसानी से समझ सकता है।
यह मेरी तरफ़ से एक छोटा सा प्रयास है कि मीरां बाई की रचनाओं को एकत्रित कर आप के सामने एक संकलन प्रस्तुत कर रही हूँ, मेरे इस प्रयास में आप सबके सहयोग की आवश्यकता होगी सो आप इन रचनाओं के अलावा कोई और रचना जानतें हों तो मुझे मेरे मेल पर अवश्य भेजें, यहाँ आप के नाम के साथ प्रकाशित की जायेगी। ( कोई मानदेय की व्यवस्था नहीं है)
व्याकरण कि गल्तियाँ होनी स्वाभाविक है सो आप से अनुरोध है कि उनके लिये आप बेहिचक लिखें।
धन्यवाद
निर्मला सागर

pankaj बेंगाणी said
नमस्कार भौजाईजी (भाभी).
भाईसा तो हमारे साथी हैं ही, अब आपको भी लिखते देख बहुत खुशी हो रही है. मेरी तरफ से तथा तरकश टीम की तरफ से हर्दिंक अभिनन्दन.
Dipak said
He Sagar ki Nirmal lehro pe vidyamaan Nirmala, aapka hardik abhinandan aur swagat.
Aapki likhawat se ye kahe nahi rah sakta
Hai aur bhi duniya me blogger bahut acche, kehte hai ki Nirmala ka andaze bayan aur.
mahashakti said
आपका स्वागत है यथा सम्भव सहायता करने का प्रयास करूगां
प्रमेन्द्र
http://pramendra.blogspot.com/
ranjubhatia said
बहुत अच्छा लगा इसको पढ़ के ….
शुक्रिया …
Pink said
ॐ साँई राम।।।
निर्मला जी आपका सच में आपका ब्लागर देखकर मन पुलकित हो गया। मैने हिन्दी मे टंकण अभी अभी सीखी है बहुत अच्छा लग रहा है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। बाबा साँई मेरे इष्ट है।
एक बार फिर मेरी हा्र्दिक बधाई। बहुत खूब।
Mohinder Kumar said
बहुत सुन्दर रचना है बाकी अभी बहुत कुछ पढने एंव समझने को बाकी है
मेरे ब्लाग http://dilkadarpan.blogspot.com पर पधार कर अपनी टिप्पणी से मेरी रचनाओं का मुल्याकंन करने की कृपा करें
विशेष रूप से मेरी एक कविता “केवल संज्ञान है” जो http://merekavimitra.blogspot.com पर प्रेषित है आप की टिप्पणी की प्रतीक्षा में है
मोहिन्दर
KISHORE BISHNOI said
aasi rachnaion ko samne laker aapne bahout acha kam kiya hai