बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरी ।
श्याम मैं बादल देख डरी ।
काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यो एक घरी ।
जित जाऊं तित पाणी पाणी हुई सब भोम हरी ॥
जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर कीजो प्रीत खरी ।
श्याम मैं बादल देख डरी ।

संजय बेंगाणी said
सुन्दर भजन.
आपका चिट्ठा जगत में स्वागत करता हूं, आपका आगमन हमारे लिए खुशी की बात हैं.
who is mirabai? said
Just wanted you to know there’s a new site out dedicated to presenting the spiritual implications of Mirabai’s life and teachings at
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