राम रतन धन पायो

पायो जी मैने  राम रतन धन पायो   

   वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो
जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो
खरचे ना खूटे, चोर न लूटे, दिन-दिन बढ़त सवायो
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो
 मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरष हरष जस गायो

3 Comments »

  1. Admin said

    wdewds

  2. Admin said

    cscs

  3. omkar said

    very good song

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