जागो बंसी वारे जागो मोरे ललन
रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवारे
गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे
उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढ़े द्वारे ।
ग्वाल बाल सब करत कोलाहल जय जय सबद उचारे ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर शरण आया कूं तारे ॥
जागो बंसी वारे जागो मोरे ललन
रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवारे
गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे
उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढ़े द्वारे ।
ग्वाल बाल सब करत कोलाहल जय जय सबद उचारे ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर शरण आया कूं तारे ॥
Shrish said
सागर भाईसा की इस पोस्ट के द्वारा आपके चिट्ठे पर पहुँचा। मीराबाई के भजनों का ऑनलाइन संग्रह करके आप उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। साधुवाद !